श्रीमद्भागवत पुराण सभी वेदान्तों का सार है। भागवत विद्वानों की विद्वता की कसौटी है। आध्यात्मिक दृष्टि से भी भागवत का विशेष महत्व है। भागवत का आचरण भक्ति से परिपूर्ण है। जो व्यक्ति भागवत का सुख भोग लेता है वह किसी अन्य वस्तु का सुख नहीं ले सकता। भागवत में 18000 श्लोक, 335 अध्याय और 12 स्कन्ध हैं।
श्रीमद्भागवत में भगवान विष्णु के लीलावतार की बहुत ही सरल व्याख्या की गई है। दशम स्कन्ध भागवत का हृदय है। जिसमें भगवान श्रीकृष्ण के चरित्र का भक्तिभाव से परिपूर्ण काव्य रचना के साथ बहुत ही मधुर भाषा में वर्णन किया गया है। इसमें भी रास पंचाध्यायी अध्यात्म और साहित्य का अनोखा संगम है। जिनमें वेणु गीत, गोपी गीत, भ्रमर गीत और युगल गीत ने भागवत को काव्य के उच्च स्तर पर पहुँचाया है।
भगवान शुकदेव जी द्वारा वर्णित श्रीकृष्ण प्रेम की इस सुगंध में ज्ञान, भक्ति, साधन, मर्यादा, द्वैत, अद्वैत और वैराग्य का अद्भुत संगम है। लोकप्रिय श्रीमद्भागवत पुराण को भक्तिपूर्वक सुनने से मनुष्य सभी पापों से मुक्त होकर वैकुंठ धाम को प्राप्त होता है।